Yadi Mere Pankh Hote Hindi Nibandh

Yadi Mere Pankh Hote Hindi Nibandh

Yadi Mere Pankh Hote Hindi Nibandh

          जब मैं अनंत आकाश का देखता हूँ, तब वहाँ मुझे कई सारे उडते हुए पक्षिया नजर आते हैं। उन्हे जब मैं देखता हूँ तब मेरे मन में खयाल आता कि, “यदि मेरे पंख होते तो……।” सचमुच यदि मुझे पंख मिले होते, तो मैं भी आकाश में ऊँची-ऊँची उड़ानें भरता। उड़ने में पक्षियों से होड़ लगाता। आकाश की निलिमा को अपनी आंखों में भर लेता। आसमान में उँची उडान भरकर मैं बादलों के आरपार चला जाता। 

 मंजिल उन्ही को मिलती है;
 जिनके सपनों में जान होती है|
  पंख से कुछ नहीं होता;
 हौसलों से ही उड़ान होती है।

          आज के इस युग में यात्रा संबंधित कठिनाइयाँ बढ़ गई है। इसलिए दूर की यात्रा की ईच्छा हमारे सपनों में ही रह जाता है। लेकिन अगर मेरे पंख होते, तो मैं दुनिया के सबसे मशहूर जगाहों पर घूमना जैसे पॅरिस,  दुबई , लंडन, कुतुब मिनार आदि । उम वह भी बिना  टिकट के आरक्षण के झंझट से।

          रास्ते में भी कोई भी रुकावट न आते। इतना उड़ने के बाद अगर मैं थक जाता, तो किसी पेड़ की शाखो पर विश्रांती करता। जब मुझे भूक लगती तब मैं पेड़ से फल निकलकर खा जाता। अखंड समुद्र पर उड़ते वक्त मैं किसी जहाज पर आराम कर लेता।

          मुझे प्रकृति बहुत पसंद है। मन करता तो मैं कश्मीर घूम आता । गोवा के बीचों में बहुत मजे करता । कन्याकुमारी और आबू में उड़ते उड़ते सुर्यास्त के सुंदर दृश्य अपनी आँखों से देखता।

सपनों को पंख दे दो ;
वह खुद ही उड़ कर आजाएँगे।

          इन पंखों से तो मैं कही भी उड़कर आ जाता। कहीं जाने में पैसों की आवश्यकता न होती। माँ-बाप का कुछ काम होता तो झट से काम का करके आ जाता। लेकिन असल जिंदगी में मेरे कोई पंख नही है। अगर असल में होते तो पता नही और क्या-क्या कर पाता।

आसमान में तैरना सिखों;
जमीन पर चलना तो सभी जानते हैं।

                                                                                                                     — Nishad Khuspe

                                                                                                           (St. Josephs, Navi Mumbai)

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Reference: Essay Marathi

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